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इतनी रात को वह बॉयफ्रेंड के साथ कर क्या रही थी?

इतनी रात को वह बॉयफ्रेंड के साथ कर क्या रही थी?

‘गलती उस लड़की की ही है। उस वक्त वह अपने बॉयफ्रेंड के साथ क्या करने गई थी? कोई सती-सावित्री नहीं थी जो रेप हो गया।”

नवभारतटाइम्स.कॉम पर रेप संबंधी ज्यादातर खबरों में इस तरह के कॉमेंट पढ़ने को मिल जाते हैं और उन कॉमेंट्स से बहुत से लोग सहमत भी होते हैं। अफसोस कि बहुत सारे नालायक, जिनमें मेरे कुछ ‘दोस्त’ भी शामिल हैं, बातचीत के दौरान इसी तरह के विचार प्रकट करते हैं। दिल्ली गैंग रेप के वक्त भी ऐसी ही राय थी उनकी और मुंबई गैंग रेप पर भी ऐसे ही विचार थे। उनकी यह सोच उन्हें रेपिस्टों की ही कैटिगरी में लाकर रख देती है। दोनों ही तरह के लोग या तो सेक्शुअली फ्रस्ट्रेटेड हैं या फिर उन्होंने इस मुद्दे पर कभी खुलकर सोचा ही नहीं।

इन लोगों को यह बात समझ नहीं आती कि इच्छा से किए गए सेक्स और रेप में बहुत फर्क है। अगर कोई लड़की अपने बॉयफ्रेंड के साथ कहीं जा रही है और उसके साथ सेक्स भी कर रही है, तो यह उसकी अपनी इच्छा है। इसका मतलब यह नहीं हो जाता कि कोई भी उसके साथ सेक्स कर ले। यह तो वही बात हो गई कि मैं कहीं पर छोले-चावल खा रहा होऊं और बगल में बैठा शख्स मेरे मुंह में तंदूरी चिकन का पीस घुसेड़ दे। लोग पूछें कि भई तूने ऐसा क्यों किया, तो वह शख्स कहे कि ये वहां बैठकर खा ही तो रहा था, मैंने एक लेग पीस खिला दिया तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ा?

इस चीज़ को दूसरे तरीके से समझा जाता है। मित्रो! मान लीजिए कि देर रात आप अपने दोस्त के यहां किसी पार्टी में ज्यादा वक्त लग गया। रात के 2 बज रहे हैं और आपके पास अपनी गाड़ी भी नहीं। ऐसे में आप दोस्त के घर से निकलते हैं और बाहर मेन रोड़ के बस स्टॉप खड़े हो जाते हैं। तभी सामने एक टैक्सी रुकती है और आप उसपर चढ़ जाते हैं। टैक्सी वाला रूट से अलग हटकर किसी अज्ञात जगह पर टैक्सी को रोक देता है, जहां पर चार और लोग खड़े हैं। वे आपको टैक्सी से उतारते हैं और आपके हाथ-पैर बांधकर एक कोने में ले जाते हैं। वहां पर वे बारी-बारी आपकी आपके साथ कुकर्म (ऐनल सेक्स) करते हैं। जाहिर है, यह सब आपकी इच्छा के विरुद्ध होगा। क्या हो, जब लोग आपके सदमे और पीड़ा को समझने के बजाए ये कहें कि कमबख्त तू इतनी रात को वहां क्या करने गया था, कहीं तूने भी ‘शौक’ तो नहीं पाल रखा?

जिस तरह से कोई जबरदस्ती मुझे कुछ खिला नहीं सकता, पहना नहीं सकता और यहां तक कि मेरी इच्छा के खिलाफ मुझसे बात नहीं कर सकता तो मेरे साथ सेक्स कैसे कर सकता है? यह मेरा निजी और व्यक्तिगत मामला है। मेरी भावनाओं और पसंद पर निर्भर करता है कि मैं किसके साथ क्या करूं। दिल्ली गैंग रेप केस पर लोगों का कहना था- ‘वह लड़की इतनी रात को अपने बॉयफ्रेंड के साथ आखिर क्या कर रही थी? रेप हुआ तो उसके लिए वह खुद जिम्मेदार है।’ यह सोच इतनी खतरनाक है कि लोग गंभीर अपराधी रेपिस्टों पर चर्चा करने के बजाए पीड़ित लड़की को ही निशाने पर लेने लगते हैं। रेप के मामलों में लड़कियों को ही दोषी मानने की वजह से ही बलात्कार की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। फैंट्सीज़ में डूबकर लड़कियों का चरित्र निर्धारण करने की घटिया आदत से तभी बाज आया जा सकता है, जब सोच में खुलापन हो। मेरे मित्रो! अपनी अक्ल के दरवाजे खोलो और लड़कियों की जगह खुद को रखकर सोचो। बात समझ में आ जाए तो ठीक, वरना भगवान मालिक।

Posted on: April 5, 2017Aadarsh Rathore

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