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वह बहादुर लड़की बोली- अब मैं इस कमीने को नहीं छोड़ूंगी

वह बहादुर लड़की बोली- अब मैं इस कमीने को नहीं छोड़ूंगी

सोमवार को ऑफिस के लिए लेट हो चुका था। जैसे ही बाइक लेकर कुछ दूर तक चला, गियरबॉक्स के पास वाला फुटरेस्ट टूटकर गिर गया। समझते देर न लगी कि पार्किंग में लगी बाइक पर बैठने के लिए किसी शख्स ने इसपर पूरा वजन दे दिया होगा। कई लोगों को आदत होती है बाइक्स पर बैठकर उससे छेड़छाड़ करने की। खैर, जो होना था हो चुका। तुरंत जैसे-तैसे एक मकैनिक के पास बाइक ले गया और जल्दी से एक नया फुटरेस्ट लगवाया। 15 मिनट और लेट हो चुका था। जैसे ही अमर कॉलोनी की रेड लाइट पर पहुंचा, देखा कि जाम लगा हुआ है। शायद कुछ लोग गणेश जी की प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जा रहे थे और आसपास जाते लोगों पर गुलाल फेंक रहे थे। जैसे-तैसे इस मजमे से आगे निकला, तो देखा कि एक लड़की किसी शख्स का हाथ पकड़कर उसे खींचकर एक तरफ ले जा रही है। उत्सुकतावश मैंने बाइक धीमी करके लड़की से पूछा कि क्या बात है। लड़की ने बताया कि इसने मेरे साथ छेड़छाड़ की, मेरा हाथ पकड़ लिया। अब इसे पुलिस स्टेशन ले जा रही हूं। उस जगह से अमर कॉलोनी पुलिस स्टेशन कुछ ही मीटर दूर है। मैंने कहा कि ठीक है आप चलिए, मैं पुलिस स्टेशन तक पीछे-पीछे चल रहा हूं। लड़की ने कहा कि कोई बात नहीं, आप जाइए, इसे मैं देख लूंगी। फिर भी मैं पुलिस स्टेशन तक उनके पीछे-पीछे चलता रहा।

देखा कि बाइक पर सवार दो लोग और हमारे साथ-साथ चल रहे हैं। छेड़छाड़ का आरोपी वह शख्स काफी तंदुरुस्त और मजबूत शरीर वाला था। उम्र 40 के आसपास रही होगी। जबकि वह लड़की काफी दुबली-पतली और कम हाइट की थी। यही कोई 20 साल उम्र रही होगी उसकी। मगर उसकी हिम्मत का जवाब नहीं था। वह उस मॉलेस्टर को लगभग घसीटती हुई ले जा रही थी। लोग देखते जा रहे थे कि आखिर हो क्या रहा है। पूछ भी रहे थे कि मामला क्या है। मगर इस सब से बेपरवाह लड़की लगातार आगे बढ़ रही थी। जैसे ही वे लोग पुलिस स्टेशन के गेट के पास पहुंचे, मैंने स्पीड बढ़ाई और ऑफिस के लिए निकल पड़ा। अभी कुछ मीटर आगे बढ़ा ही था कि एक चीख सुनाई दी। रियर व्यू मिरर पर मैंने देखा कि लड़की सड़क के बीचोबीच गिरी पड़ी है। मैंने तुरंत बाइक साइड पर लगाई और पीछे मुड़ा। देखा कि वह शख्स लड़की को धक्का देकर भाग रहा है। देखा कि पास खड़ी कुछ महिलाएं उस लड़की को सहारा देकर उठा रही हैं। मैं तुरंत बाइक को वहीं छोड़कर उस शख्स का पीछा करने लगा। मेरा वजन इन दिनों कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। इसलिए इससे पहले कि मैं उस शख्स तक पहुंच पाता, देखा कि वह लड़की दौड़ती हुई मेरे से आगे निकल गई है। कुछ ही पलों में उसने उस शख्स को पकड़ लिया। लेकिन अब वह शख्स हिंसक होकर उस पर हमला करने की कोशिश करने लगा। इससे पहले कि वह लड़की को चोट पहुंचाता, मेरी किक उसे सड़क पर बिछा चुकी थी। मन कर रहा था कि वहीं उसकी धुनाई कर दूं। लेकिन फिर किसी तरह गुस्से पर काबू पाया और घसीटते हुए उस शख्स को पुलिस स्टेशन तक ले गया। इस दौरान उस लड़की ने भी उसे पकड़े रखा।

मैंने देखा कि लड़की की ठुड्डी और कुहनी पर चोट आ चुकी है और खून बह रहा है। मैंने कहा कि आप इसे छोड़ दीजिए, मैंने पकड़ा हुआ है। मगर लड़की ने कहा कि इस कमीने को अब मैं नहीं छोड़ूंगी। सीधे अमर कॉलोनी पुलिस स्टेशन के अंदर ले जाकर उस शख्स को पटका। उस लड़की ने पुलिसवालों को बताया कि कैसे रिक्शा पर वह जा रही थी तो इसने उसका हाथ पकड़ लिया था। मालूम हुआ कि उसने शराब भी पी रखी थी। लड़की ने पुलिसवालों से कहा कि मेरे ममी-पापा को बुला लीजिए। अब वह थोड़ी रोआंसी हो चुकी थी। और मैं यह दावे के साथ कह सकता हूं कि चोट लगने की वजह से हो रहे दर्द की वजह से ही वह ऐसा था, न कि किसी घबराहट की वजह से। मैंने देखा कि पुलिसवाले हक्के-बक्के थे। वहां पर तैनात एक महिला कॉन्स्टेबल ने उस लड़की को एक तरफ बिठाया और पूरा मामला पूछा। लड़की उन्हें बताने लगी कि कैसे-कैसे क्या हुआ। अब तक घड़ी पर मेरी नजर पड़ी। ऑफिस के लिए बहुत देर हो चुकी थी और फोन काम न करने की वजह से इन्फॉर्म भी नहीं कर पा रहा था। इसलिए वहां से निकल पड़ा। बाहर आकर बाइक ढूंढी और उस पर सवार होकर ऑफिस की तरफ निकल पड़ा।

रास्ते भर मैं सोचता रहा कि काश! मैंने कोई तस्वीर ले ली होती या लड़की से बातचीत करके और जानकारी जुटाई होती, ताकि उसकी बहादुरी पर खबर बनाई जा सके। मगर किसी वजह से ऐसा हो नहीं पाया। पता नहीं वह लड़की कौन थी। उसका क्या नाम था, क्या करती थी, कहां रहती थी। लेकिन जो हिम्मत उसने दिखाई, वह काबिल-ए-तारीफ है। यह घटना इस ब्लॉग के जरिए आप सभी के साथ शेयर कर रहा हूं। इस उम्मीद के साथ कि उस लड़की की हिम्मत कइयों के लिए प्रेरणा बन सके। लड़कियां यह ठान लें कि वे ऐसे किसी शख्स से नहीं डरेंगी। हाथ पकड़कर पुलिस स्टेशन ले जाना न सही, कम से कम शोर तो मचाएं। आसपास के लोगों को उस शख्स की हरकत के बारे में बताएं। यकीन मानिए, कुछ लोग तो आपकी मदद करने जरूर आगे जाएंगे।

Posted on: April 5, 2017Aadarsh Rathore

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